नात्सीवाद और हिटलर का उदय - नोट्स नात्सीवाद और हिटलर का उदय (कक्षा 9 - इतिहास - एनसीईआरटी) 1. परिचय 30 जनवरी 1933 को हिंडेनबर्ग (जर्मनी के राष्ट्रपति) ने एडोल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। हिटलर की पार्टी नेशनल सोशलिस्ट जर्मन वर्कर्स पार्टी (NSDAP) — जिसे नात्सी पार्टी कहा जाता है — सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी थी। हिटलर ने सत्ता में आते ही संवैधानिक, कानूनी और असैनिक ढांचे को नष्ट कर दिया और पूरे देश पर पूर्ण नियंत्रण (अधिनायकवाद/Totalitarianism) स्थापित कर लिया। 2. प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी की स्थिति जर्मनी की हार और वाइमर गणराज्य 1914 में शुरू हुए प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी को 1918 में हार का सामना करना पड़ा। अधिकतर जर्मन लोग इस हार के लिए राजतंत्र को दोषी मानते थे। इसलिए नवंबर 1918 में एक विद्रोह के बाद कैसर (सम्राट) को गद्दी छोड़नी पड़ी और सत्ता एक नई सरकार को सौंप दी गई। नई सरकार का नाम वाइमर गणराज्य पड़ा (क्योंकि इसका संविधान वाइमर शहर में बनाया गया था)। वर्साय की संधि (Treaty of Versailles) - 1919 मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी पर ...